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    भारत सरकार द्वारा देश में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियन्त्रण कार्यकम वर्ष 1955 में लागू किया गया, तथा राजस्थान में यह कार्यकम वर्ष 1970-71 में शुरू किया गया, जिसे वर्ष 1983 में “राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम" नाम दिया गया। वर्ष 1982 में मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) औषधी उपयोग में लायी गयी।

 

    यह कार्यकम भारत सरकार द्वारा Target Free कार्यकम है, परन्तु राज्य में कार्यकम के मूल् रोगियों की त्वरित खोज हेतु जिलो को लक्ष्य आवंटित किये जाते है।

 

कार्यकम के उद्देश्य :

 

  • कुष्ठ रोग का प्राथमिक अवस्था में पहचान कर शीघ्र पूर्ण उपचार करना।
  • संकामक रोगियों का शीघ्र उपचार कर संकमण की रोकथाम।
  • नियमित उपचार द्वारा विकलांगता से बचाव ।
  • विकृतियों का उपचार कर रोगियों को समाज का उपयोगी सदस्य बनाना।
  • स्वास्थ्य शिक्षा द्वारा समाज में इस रोग के सम्बन्ध में फैली गलत अवधारणाओं को दूर करना।

   

    राज्य में दिसम्बर 2015 तक 67374 कुष्ठ रोगियों की खोज की गई है। अब तक 66206 रं उपचार देकर रोगमुक्त किया जा चुका है। राज्य में वर्तमान में 1168 रोगी उपचार प्राप्त कर रहे हैं । वर्तमान में राज्य में कुष्ठ रोग प्रसार दर 0.16 प्रति दस हजार जनसंख्या है। जबकि कुष्ठ रोग की राष्ट्रीय प्रसार दर 0.69 प्रति दस हजार जनसंख्या है।

   

    राज्य में यह कार्यकम भारत सरकार एवं राज्य सरकार के सहयोग से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत निम्नलिखित इकाईयाँ कार्यरत है :-

 

क्र.सं.   कुष्ठ नियंत्रण ईकाई का नाम   संख्या 
जिला /निदेशालय
1 राज्य कुष्ठ रोग उन्मूलन ईकाई   1 निदेशालय  
2 जिला कुष्ठ रोग इकाईयाँ 4 1.नागौर, 2. जोधपुर, 3. जयपुर, 4. बारां
3 कुष्ठ रोग चिकित्सालय 2 1. जयपुर 2. जोधपुर
4 कुष्ठ रोग नियन्त्रण इकाईयाँ
6 1. भरतपुर 2. बून्दी 3. झालावाड  4. कोटा 5. उदयपुर 6. श्री गंगानगर

 

राज्य में कुष्ठ रोग की रोकथाम हेतु निम्नांकित उपाय किये जा रहे है:-

    वर्ष 2000 तक यह कार्यक्रम वर्टिकल स्टाफ के द्वारा चलाया जाता था, परन्तु अब कार्यकर्ताओं की कमी एवं भारत सरकार के निर्देशानुसार इस कार्यक्रम को प्राइमरी हैल्थ केयर सिस्टम के तहत अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ इंटिग्रेट करते हुये वर्ष 2001 से होरिजेन्टल स्वरूप प्रदान किया गया, जिसके तहत राज्य के सभी  हैल्थ सेन्टर/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व अन्य चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत सभी चिकित्सा अधिकारियों, पैरा  मेडिकल एवं मेडिकल स्टाफ को उक्त कार्यक्रम की बेसिक ट्रेनिंग/ओरियंटेशन ट्रेनिंग देकर कार्यक्रम को अधिक  गति देने हेतु तैयार कर दिया गया है तथा सभी चिकित्सा संस्थानों पर निशुल्क औषधी उपलब्धता सुनिश्चित गई है।

 

 

  • कुष्ठ रोगियों की प्रारम्भिक अवस्था में खोज हेतु आशा सहयोगनियों को कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यकम में जोड़ा गया है, इन्हे रोग संबंधी प्रशिक्षण दिया जा कर कुष्ठ रोगी की खोज एवं उपचार दिलवाये जाने पर निम्नानुसार मानदेय दिए  जाने का प्रावधान है :-

                1.     दृश्य विकृति से पूर्व नये कुष्ठ रोगी की पहचान होने पर – 250 रूपये

                2.     हाथ, पैर व ऑख में दृश्य विकृति पश्चात नये कुष्ठ रोगी की पहचान होने पर- 200 रूपये

 

पूर्ण उपचार पश्चात देय मानदेय (केवल आशा सहयोगनियों को )

                1.   पी.बी. केसेज के लिए - 400/- रूपये

                2.   एम.बी. केसेज के लिए - 600/- रूपये

 

  • विकलांगता की रोकथाम एवं चिकित्सा पुनर्वास गतिविधि (डीपीएमआर) के तहत कुष्ठ रोग से विकृती/ विकलांगता होने पर रि-कन्सट्रेक्टिव सर्जरी करवाये जाने हेतु सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर को भारत सरकार द्वारा सर्जरी केन्द्र अधिकृत किया गया है। इसके लिए रि-कन्सट्रेक्टिव करवाने वाले कुष्ठ रोगी 8000/- रूपये एवं रि-कन्सट्रेक्टिव सर्जरी करने वाले चिकित्सा संस्थान को 5000/- रूपये की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
  • कुष्ठ रोगियों को निशुल्क मल्टी ड्रग थेरेपी (एम.डी.टी) औषधी, सहायक औषधियाँ (वेसलीन, गॉज, बेन्डेज, ओंइन्टमेन्ट, पेन किलर, एन्टीवाइटिक, एन्टी रिएक्सनरी आदि) तथा डी.पी.एम.आर– कम्बल, गोगल्स, एम.सी. आर. चप्पल, केचेज, वॉकिंग स्टीक आदि निशुल्क उपलब्ध करवायी जाती है।
  • समाज में कुष्ठ रोग संबंधी फैली गलत धारणाओं को दूर करने हेतु राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रचार-प्रसार गतिविधियाँ संपादित की जाती है, जैसे - नुक्कड नाटक, नारा लेखन, फ्लेक्स बेनर, बस टिकिटों के पीछे कुष्ठ रोग सम्बन्धी जानकारियाँ, पम्पलेट, टी.वी. स्पॉट, होर्डिंग, वाद विवाद प्रतियोगिता एवं आई.पी.सी. वर्कशॉप आदि करवायी गयी।
  • चिकित्सा अधिकारी, पैरा मेडिकल स्टाफ एवं आशा सहयोगनियों को कुष्ठ रोग सम्बन्धी प्रशिक्षण।
  • लेप्रोसी कॉलोनी में किसी एक रोग मुक्त कुष्ठ रोगी को प्रशिक्षित कर कॉलोनी के सभी कुष्ठ रोगियों की सेल्फ केयर गतिविधि एवं ड्रेसिंग करेगा। इस हेतु 1000/- रूपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
  • राज्य सरकार के विजन-2020 के तहत प्रदेश को वर्ष 2020 तक कुष्ठ रोग मुक्त प्रदेश घोषित किये जाने का लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए सभी जिलों में जिला न्यूक्लियस का गठन किया गया, जिसके अन्तर्गत कुष्ठ रोगी की प्रारम्भिक अवस्था में खोज कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर ही उपचार उपलब्ध करा दिया जावेगा।
  • जिला न्यूक्लियस टीम को कुष्ठ रोग संबंधी प्रशिक्षण देकर कार्यकम में उनकी कार्य सम्बन्धी जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी गयी है।
  • सभी चिकित्सा संस्थानों में प्रत्येक माह के अन्तिम बुधवार को कुष्ठ रोग कार्य दिवस के रूप में मनाते हुए कुष्ठ रोग सम्बन्धी गतिविधियों सम्पादित करने का निर्णय लिया गया।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की अभिशंषाओं की क्रियान्विती के सम्बन्ध में सभी संबंधित विभागों द्वारा कुष्ठ रोगियों के सम्मान पूर्वक जीवन यापन करने के सम्बन्ध में आवश्यक कदम उठायें जा रहे है।

 

कार्यक्रम की तीन वर्षो की प्रगति रिपोर्ट

वर्ष   नये खोजे गये कुष्ठ रोगी
 
उपचार उपरान्त रोग मुक्त किये गये रोगी     प्रसार दर प्रति 10000 जनसंख्या   
लक्ष्य   प्राप्ति   %प्राप्ति
लक्ष्य
प्राप्ति
%प्राप्ति
राज्य   रास्ट्रीय  
2013-14 1150 1079 93.83 1173 1036 88.32 0.17 0.73
2014-15 1160 1060 91.38 1215 1128 92.84 0.16 0.68

2015-16

Dec, 15

1100 845 76.82 1147 824 71.84 0.16 0.69

 

कार्यक्रम की तीन वर्षो में खोजे गये नये कुष्ठ रोगियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला रोगियों की संख्या:-

वर्ष
नये खोजे गये रोगी 
पुरुष रोगी 
महिला रोगी 
महिला प्रतिशत 
अनुसूचित जाति    अनुसूचित जनजाति   
2013-14 1079 785 294 27.25 164 116
2014-15 1060 768 292 27.55 140 122

2015-16

Dec,15

845 632 213 25.21 173 98