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फ्लोरोसिस - पीने के पानी मे 1 PPM (1 mg/liter) से ज्यादा फ्लोराइड का लगातार सेवन करने से फ्लोराइड युक्त पदार्थों का अधिक मात्रा में लगातार सेवन से दांत, हड्डी व अन्य अंगो मे विकार उत्पन् होने को फ्लोरोसिस कहते है।

फ्लोरोसिस तीन प्रकार का होता है -

        1. दन्त फ्लोरोसिस      2. अस्थि फ्लोरोसिस    3. गैर अस्थि फ्लोरोसिस

 

राज्य में राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यकम के उद्देश्य :

        1. कम्यूनिटी सर्वे– प्रभावित इलाको का डोर टु डोर सर्वे कर फ्लोरोसिस से ग्रसित मरिजो का डात् कलेक्शन करना

 

        2. स्कूल सर्वे- स्कूल में छ से ग्यारह वर्ष के बच्चो का सर्वे कर फ्लोरोसिस ग्रसित बच्चो का डाटा कलेक्शन करना

 

        3. अन्तरविभागीय समन्वय- नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए दूसरे विभाग (पीएचइडी एव शिक्षा विभाग से समन्वय कर फ्लोराइड से रहित पानी उपलब्ध करवाने के लिये आर0 ओ0 की व्यवस्था करवा की राय देना।

 

        4. फ्लोरोसिस कैसेज की रोकथाम, निदान एवं उपचार के लिए आवश्यकतानुसार सरकारी चिकित्स् संस्था (पीचसी/सीएचसी/सेटेलाईट अस्पताल/जिला अस्पताल/मेडिकल कॉलेज) पर  रेफ़र  करना ।

 

भारत मे 21 राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश जिसमें 270 जिलों में 6.60 करोड़ लोग प्रभावित है एवं 60 लार लोग पीड़ित है ।

 

राजस्थान में वर्तमान परिदृश्य :-

राजस्थान में सभी 33 जिले फ्लोरोसिस से प्रभावित है, वर्तमान में राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एं रोकथाम कार्यकम राज्य के 23 जिलों में संचालित हो रहा है। 18 जिले जिनमें यह कार्यकम पहले से चत् रहा है वो जिले हैं :- नागौर, अजमेर, राजसमंद, टोंक, जोधपुर, जयपुर, जालोर, जैसलमेर, उदयपुर जिले (गंगानगर, करोली, झालावाड़, चित्तोडगढ़, झुन्झूनु) इस कार्यकम में वर्ष 2014 में सम्मिलित किये गये।

 

एनपीपीसीएफ कार्यकम में प्रत्येक जिलों में एक फ्लोरोसिस सेल गठित की गई है जिसमें एक जिल सलाहकार (फ्लोरोसिस) एक लेब टेक्नीशियन एवं तीन फिल्ड इंवेस्टीगेटर (प्रत्येक केवल 6 माह के लिए पूर्णतः संविदा पर कार्यरत है। जिला सलाहकार द्वारा प्रभावित इलाको का सर्वे कर पीने - मरिजो का मूत्र सेम्पल एकत्रित किया जाता है एवं लैब टेक्निशीयन द्वारा एकत्रित किये गये पानी व मूत्र व सेम्पल की जांच की जाती है।

 

कार्यकम कार्यकलापः-

        1. प्रभावित इलाकों में आई ई सी (Information, Education and Communication)  द्वारा डू एवं डोन्ट डू की जानकारी देना।

        2. प्रभावित इलाकों मे वर्षा का जल संचय (वाटर हार्वेस्टिंग तंत्र) विकसित करने के लिये लोग को प्रेरित करना।

        3. पीएचईडी व अन्य सम्बन्धित विभागों से तालमेल कर फ्लोराइड रहित पानी उपलब्ध करवाना।

        4. अत्यधिक प्रभावित व्यक्तियों की निःशुल्क जांच व शल्य चिकित्सा करवाकर फ्लोराइड फ्री पानी उपलब्ध करवाना व फोलोअप करना ।

 

कार्यकम की प्रगति (माह दिसम्बर, 2015)

A प्रशिक्षण प्रगति (कार्यकम के अन्तर्गत निम्न को फ्लोरोसिस के बारे में प्रशिक्षिण दिया गया)

क्र.स. पद संख्या
1 चिकित्सा अधिकारी   2233
2 डीएलओ/एनजीओ/मीडिया 848
3 एएनएम/एलएचवी/एमपीडब्लू 9560
4 आंगनबाड़ी/आशा/अध्यापक 22927

 

B भौतिक प्रगति :-

  • कार्यकम के अंतर्गत अभी तक 23 जिलों में 362686 व्यक्तियों व 235411 स्कूली बच्चों का सर्वे किया जा चुका है।सर्वे में 184895 दंत फ्लोरोसिस के संभावित मरीज, 30335 अस्थि (फ्लोरोसिस) रोग के संभावित मरीज व 11188 गैर अस्थि (फ्लोरोसिस) रोग के संभावित मरीज पाये गये है।
  • कार्यकम के अंतर्गत 18 जिलों में आइनोमीटर लगाया जा चुका है जिससे पीने के पानी में व सम्भावित मरिजो के मूत्र में फ्लोराइड की जांच की जा रही है।
  • अभी तक 23895 संभावित मरीजों के मूत्र की जांच की जा चुकी है। जिसमें 17590 मरीजों के पेशाब में फ्लोरोइड स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है।पानी के 8951 स्त्रोतों की जांच की जा चुकी है। जिसमें 5920 स्त्रोतों में फ्लोरोइड स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है।
  • राजस्थान के 23 जिलों में मरीजों के पुनर्वास एवं उपचार के लिए दवाईया व उपकरणों आरएमएससी द्वारा क्रय कर उपलब्ध कराई गई है और उपचार की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। राज्य में फ्लोरोसिस से प्रभावित 13829 सम्भावित मरीजों को दवाईयां वितरित की जा चुकी है।