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    संसार में लगभग 1.5 बिलियन व्यक्ति आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों (Iodine Defic Disorders – IDD) से पीड़ित हैं। विश्व भर में यह माना गया है कि आयोडीनयुक्त नमक के प्रयोग करने से आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों से बचा जा सकता हैं। भारत विश्व में आयोडीन की कमी से प्रभावित राष्ट्रों में से एक हैं। आई.सी.एम.आर. द्वारा किये गये अध्ययन से ज्ञात होता है कि कोई राज्य ऐसा नहीं है जहाँ आई.डी.डी. से प्रभावित व्यक्ति न हो। एक सर्वेक्षण में भारत में 28 राज्यों के 324 जिलों एवं 7 यूनियन टेरीटरिज 263 जिले आई.डी.डी. से प्रभावित पाये गये।

 

    इसके अतिरिक्त महिलाओं में गर्भपात व वयस्कों में ऊर्जा की कमी, जल्दी थकावट आदि विकार भी  आयोडीन की कमी से हो सकते हैं ।

 

आयोडीन की शरीर में आवश्यकताः-

 

    आयोडीन शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व हैं। प्रत्येक व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु 150 माईक्रोम आयोडीन की प्रतिदिन आवश्यकता होती हैं। यह माना जाता है कि प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, वनों के उजड़ने से खाद्य पदार्थों में आयोडीन की मात्रा कम हो गई हैं। इसकी पूर्ति नियमित रूप से आयोडीन नमक के सेवन से हो सकती हैं। आयोडीन को नमक में मिलाने से गंध, स्वाद व रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता हैं। नमक में आयोडीन मिलाने का खर्चा बहुत कम होता हैं।

 

नमक के आयोडीनिकीकरण की योजना:-

 

    भारत सरकार ने सन् 1954 में प्रोफेसर वी. रामालिंगास्वामी द्वारा अनुसंधान कराया गया। तब यह पता चला कि घेघा रोग भारत में सभी राज्यों में पाया जाता है। तब भारत सरकार ने सर्वप्रथम 1962 में राष्ट्रीय घेघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया गया। इस कार्यक्रम की महत्वता को देखते हुए सन् 1986 में इसे प्रधानमंत्री जी के 20 कार्यक्रम में शामिल किया गया। सन् 1988 में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में संशोधन करके उनमें इस नियम को शामिल किया गया कि उत्पादन स्तर पर नमक में आयोडीन की मात्रा 30 पी.पी.एम. व फुटकर बिक्री के 15 पी.पी.एम. से कम नहीं होनी चाहिए।

राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम - 1992

    सन् 1992 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय घेघा नियन्त्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम रख दिया। इसी वर्ष राज्य सरकार ने 5 दिसम्बर 1992 को आदेश जारी कर पी.एफ.ए. अधिनियम 1954 के अन्तर्गत आयोडीन रहित खाने योग्य नमक के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। राज्य में 1993-94 में इस कार्यक्रम की शुरुआत निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में आई डी डी सैल की स्थापना के साथ की गई।

 

कार्यक्रम का लक्ष्य : राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य घेघा रोग की दर ऐनडेमिक जिलों में 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।

 

भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम के निम्न उद्देश्य निर्धारित किये गये हैं -

 

  • सर्वे द्वारा आई.डी.डी. के MAGNITUDE की जानकारी रखना।
  • साधारण नमक के स्थान पर आयोडाईज्ड नमक की उपलब्धता को सुनिश्चित करना।
  • पाँच वर्ष पश्चात् पुनः सर्वे के द्वारा आई.डी.डी. का सर्वे करवाना एवं आयोडाईज्ड नमक के प्रभाव की जानकारी प्राप्त करना।
  • प्रयोगशाला में मूत्र एवं आयोडीनयुक्त नमक में आयोडिन की मात्रा की जाँच करना।
  • स्वास्थ्य शिक्षा देना।

 

संगठनात्मक ढाँचा :-

    इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने हेतु राज्य स्तर पर कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत टेक्निशियन तथा एक लैब असिसटेंट का पद स्वीकृत हैं। इस कार्यक्रम को राज्य में सुचारू रूप से क्रियान्वित करने हेतु राज्य स्तर पर वर्तमान में निदेशक (जन. स्वा.) इस कार्यक्रम के प्रभारी हैं, जिनकी सहायता करने हेतु अतिरिक्त निदेशक (ग्रा0स्वा0) के अधीन नोडल अधिकारी हैं। जिला स्तर पर इस कार्यक्रम के संचालन हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को प्रभारी अधिकारी बनाया गया हैं।

 

भौतिक उपलब्धियों:-

वर्ष                        
एफ.एस. एक्ट के अन्तर्गत लिये गये नमूने आयोडीन रहित पाये गये    नमूने       नॉन. एफ.एस.एस. एक्ट के अन्तर्गत लिये गये नमूनों की संख्या
आयोडीन रहित 15 पी.पी.एम.सेकम 15 पी.पी.एम. से अधिक
2013 280

मिसब्रान्डेड -30

मिलावटी - 9

4646 73176 294695  
2014 252 सब स्टैण्डर्ड/अनसेफ/मिसब्रान्डेड/अन्य - 31
4637
60895 198414

2015

(दिस. तक प्राप्त)

323   सब स्टैण्डर्ड/अनसेफ/मिसब्रान्डेड/अन्य - 36 2208 37502 156339

   

प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को राज्य के समस्त जिलों में ग्लोबल आई.डी.डी. दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न प्रकार की गतिविधियों जैसे सेमिनार, कार्यशालाएँ, रैली, प्रतियोगिताएँ आदि का आयोजन किया गया। राज्य स्तर पर जयपुर शहर के स्लम एरिया में आर.सी.एच. सेन्टर एवं डी हैल्थ सेन्टर के प्रभारियों के सहयोग से चयनित स्कूली बच्चों को कठपुतली शो, नट व कच्ची घोड़ी के माध्यम से आयोडीन युक्त नमक की उपयोगिता हेतु जागरूक किया जा रहा हैं।

 

    यह हमारे लिए गर्व की बात है कि राजस्थान देश में नमक का द्वित्तीय सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है इसलिये क्षेत्रीय नमक आयुक्त कार्यालय की स्थापना जयपुर में की गयी। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम के तहत् राज्य में नमक निर्माता, नमक विक्रेता, नमक ट्रांसपोर्टर को आयोडीन के बारे में जागरूकता हेतु फलौदी (जोधपुर), अजमेर, बीकानेर, नांवा (नागौर) में कार्यशाला आयोजित की गई, जिनमे नमक व्य शामिल किया गया। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम के तहत् राज्य में नमक नि विक्रेता, नमक ट्रांसपोर्टर को आयोडीन के बारे में जागरूकता हेतु उदयपुर, कोटा एवं जोधपुर मे कार्यशाल् कराया जाना प्रस्तावित है। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत राजस्थान राज् भीलवाडा, डूंगरपुर, करौली एवं टोंक में सर्वेक्षण करवाया जाना प्रस्तावित है।

 

    एफएसएसए एक्ट में नमक के लिये गये एवं जांच किये गये नमूनों के अनुसार राजस्थान राज्य में 81% आयोडीनयुक्त नमक मानक स्तर का पाया गया हैं साथ ही गर्भवती महिलाओं द्वारा पर्याप्त रूप से आयोडी उपयोग के मूल्यांकन हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, एवं उदयपुर मे विशेष सर्वे का कार्य प्रक्रियाधीन है।