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    राज्य में मलेरिया एवं अन्य वैक्टर जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय वैक्टर जनित नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2015 में 1979 गांवों के 777 उप केन्द्रों में 25.37 लाख की अति संवेदनशील जनसंख्या क्षेत्र पर डीडीटी का छिडकाव करवाया गया।

    मलेरिया कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष 2015 में 80.17 लाख रक्तपटिट्काओं की जांच का लक्ष्य रखा गया था। जिसके  विरूद्ध 90.06 लाख रक्त पटिटकाओ का संचयन व परीक्षण किया गया।

    मलेरिया रोगियों के सर्वेक्षण, निदान एवं त्वरित उपचार हेतु राज्य में 2128 मलेरिया क्लिनिक कार्यरत है।   पी.एफ. रोगियों का तुरन्त उपचार एवं फॉलोअप की व्यवस्था को अधिक सुदृढ बनाया गया है, ताकि पी.एफ. मलेरिया से मृत्यु को रोका जा सके।

 

  1. दिनांक 01.04.2015 से 14.05.2015 तक मलेरिया क्रैश कार्यक्रम का प्रथम चरण एवं दिनांक 16.10.1 30.11.15 तक द्वितीय चरण चलाया गया।
  2. दिनांक 15.05.2015 से 31.07.2015 तक कीटनाशक स्प्रे का प्रथम चक्र एवं दिनांक 01.08.15 से 15.1 तक द्वितीय चक्र चलाया गया।
  3. माह जून को मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाया गया।
  4. मलेरिया की जांच हेतु निःशुल्क रक्त पटिट्का बनाई जाती है।
  5. नई औषधी नीति के अनुसार मलेरिया पी.वी. केसेज को 14 दिन तक कम्पलीट रेडिकल ट्रीटमेन्ट दिय रहा है एवं प्रत्येक पी.एफ. केस को ACT से उपचारित किया जा रहा है। इस हेतु आशा को रू. 75 प्रति आर.टी. का इन्सेन्टिव दिया जा रहा है। मलेरिया के उपचार हेतु निःशुल्क औषधियां वितरित की है।
  6. मच्छरों के पनपने हेतु ऐसे पानी के स्त्रोत जिनमें लम्बे समय तक पानी भरा रहता है में लार्विवोरस  गम्बूशिया मच्छलियाँ (बायोलोजिकल कन्ट्रोल) डाली जाती है। उक्त एन्टीलार्वल गतिविधियां मलेरिया के वाहक मच्छर के घनत्व को कम करने के लिए संचालित की जाती हैं। राज्य मे गम्बूशिया मछलियों पालने हेतु कुल 2694 हैचरीज कार्यरत हैं।
  7. पेयजल टांकों में टेमीफॉस (Temephos) नामक कीटनाशक सतत् रूप से मच्छरों के प्रजनन स्थल मच्छरों की उत्पत्ति पर प्रभावी नियंत्रण हेतु काम में लिया जा रहा है। लार्वारोधी कीटनाशक बी.टी.आई झील, तालाब, स्थिर और स्थायी जल स्त्रोतों, सिंचाई और धीमी गति से चलती नहरें, कुओं, कूलर, ना और खाली कंटेनर में उपयोग किया जा रहा है। जो पानी पीने योग्य नहीं है उसमें जला हुआ (MLO) डाला जा रहा है। मलेरिया ऑयल एक भाग कैरोसिन, तीन भाग जला हुआ तेल एवं छः डीजल को मिलाकर बनाया जाता है। इस तेल के प्रभाव से गन्दें पानी में पैदा होने वाले मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण रहता है।

 

डेंगू

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग  नियंत्रण कार्यक्रम

यह वेक्टर जनित वायरल रोग है जो एडीस एजिप्टी नामक मच्छर के माध्यम से फैलता हैं। यह मच्छर घरेलू वातावरण में एवं आस-पास इकट्ठे साफ पानी में उत्पन्न होता है। डेंगू की रोकथाम हेतु मच्छर एवं लार्वा रोधी गतिविधियां तथा त्वरित जांच एवं उपचार गतिविधियां किया जाना आवश्यक है। इस हेतु राज्य सरकार ने वार्षिक कार्य योजना के तहत सभी जिलों में एवं चिकित्सा संस्थाओं को आवश्यक निर्देश जारी किये । आम जन को जाग्रत करने के लिए घरेलू स्तर पर डेंगू से बचाव के उपाय हेतु समाचार पत्रों, इलेक्ट्रोनिक मीडिया एवं होर्डिंग आदि के माध्यम से बचाव एवं उपचार की जानकारी दी गई। जनता को अपने घरो में सभी जगह पर साफ सफाई का पूर्ण ध्यान रखनें, घरों के आस-पास पानी इकटठा नही होने देने एवं पुराने टायर, कबाड एवं कूलर व घरो में प्रयुक्त पानी की टंकियो की साप्ताहिक सफाई करने हेतु IEC गतिविधियां राज्य एवं जिला स्तर पर करवाई गई।

 

डेंगू केस पाये जाने पर रोगी के घर एवं उसके आस-पास के घरों में फॉगिंग मशीन के द्वारा फॉगिंग कार्य पायरेश्रम 1 भाग एवं डीजल 19 भाग का मिश्रण बनाकर धुंए के रूप में फॉगिंग मशीन द्वारा सम्पादित किया जाता है जिससे रोग से संक्रमित मच्छर को तत्काल मारा जा सके। इस हेतु 55 फॉगिंग मशीन संवेदनशील जिलों में उपलब्ध है जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर तुरन्त कार्य में लिया जाता है।

 

राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों एवं अन्य जिलो के सामान्य अस्पताल को शामिल करते हुए कुल 27 सेन्टीनल सेन्टर डेंगू एवं चिकनगुनिया के उपचार हेतु चिन्हित किए गए है। डेंगू एवं चिकनगुनिया ELISA के परीक्षण हेतु राष्ट्रीय वायरोलोजी संस्थान (NIV) पुणे के माध्यम से उक्त सेन्टीनल सेन्टर को विशेष जांच किट उपलब्ध कराए जाते है।

 

माह जुलाई को डेंगू रोधी माह के रूप में मनाया जाता हैं ।

 

डेंगू रोग की तुलनात्मक विवरण तालिका (2013 से 2015)

वर्ष   रोगी   मृत्यु
2013 4413
10  
2014 1243   7
2015 4043 7

 

चिकनगुनिया रोग की तुलनात्मक विवरण तालिका (2013 से 2015)

वर्ष   रोगी  
मृत्यु
2013 23
0
2014 50
0
2015 09
0