आयुर्वेद का इतिहास

राजस्थान निर्माण से पूर्व देशी रियासतो में आयुर्वेद की स्थिति

 

  • राजस्थान एक ऐसा राज्य है, जहां आयुर्वेद का उत्तरोत्तर क्रमिक विस्तार एवं सुदृढीकरण हुआ है एवं इसके पीछे राज्य सरकार की भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के प्रति संरक्षण परक नीति प्रमुख कारण रही है। राज्य के विद्वान आयुर्वेदज्ञों ने इस पद्धति के मूल स्वरूप को अक्षुष्ण बनाये रखने में पूर्ण लगन व निष्पृह भाव से कार्य किया है। गुरू-शि‍ष्य परम्परा ने राज्य में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया है।

 

  • प्रारम्भ में आयुर्वेद को संस्कृत शि‍क्षा के साथ पढाया जाता था। भूतपूर्व जयपुर राज्य के शासकों द्वारा इसे संरक्षण प्रदान करते हुए जयपुर में एक आयुर्वेद कालेज की स्थापना की गयी। भूतपूर्व उदयपुर व अलवर राज्यों में भी ऐसे शैक्षणिक संस्थान थे, जहां आयुर्वेद की शि‍क्षा दी जाती थी। जयपुर,जोधपुर व उदयपुर में आयुर्वेद औषध निर्माण हेतु रसायनशालाये स्थापित थी। राजस्थान निर्माण के पूर्व वर्ष 1950 में विभिन्न रियासतों में 346 आयुर्वेद औषधालय संचालित किये जा रहे थे।

 

राजस्थान राज्य की स्थापना के बाद आयुर्वेद की स्थिति

 

  • स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात्‌ जब विभिन्न रियासतों का एकीकरण कर, राजस्थान राज्य का निर्माण हुआ, उस समय आयुर्वेद विभाग को प्रारम्भिक तौर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन रखा गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हीरालाल शास्त्री ने विभिन्न आयुर्वेदिक संस्थाओ के एकीकरण हेतु एक कमेटी का गठन किया, जिसका कार्य भूतपूर्व राज्यों की विभिन्न आयुर्वेद संस्थाओं व इनमें कार्यरत कार्मिको की वेतन श्रृंखलाओं का एकीकरण कर आयुर्वेद के विकास हेतु सुझाव देना था। कमेटी का अध्यक्ष कविराज प्रतापसिंह जी को बनाया गया। इस कमेटी की सिफारिशो पर आयुर्वेद विभाग को निम्न तीन स्वतन्त्र विभागाध्यक्षो के अधीन पुनर्गठित किया गया -

 

       निदेशक, अस्पताल व औषधालय

 

       अधीक्षक, आयुर्वेद स्टडीज

 

       मैनेजर, आयुर्वेद रसायनशालाये

 

  • निदेशक, औषधालय व अस्पताल- के अधीन 7 निरीक्षणालय उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, अलवर, भरतपुर, डूंगरपुर व बून्दी में थे। तत्समय 346 औषधालय कार्यरत थें।

 

  • अधीक्षक, आयुर्वेद स्टडीज- के अधीन जयपुर व उदयपुर के आयुर्वेद कालेज थे, जहां 4 वर्षीय भिषग्वर डिप्लोमा व 6 वर्षीय भिषगाचार्य उपाधि पाठ्यक्रम संचालित थे।

 

  • मैनेजर, आयुर्वेद रसायनशालाये- के अधीन 4 आयुर्वेद औषध निर्माण शालायें जयपुर, जोधपुर, उदयपुर व भरतपुर में संचालित थी। इनकी देखरेख हेतु प्रभारी अधिकारी नियुक्त थे।

 

  • तीन इकाईया स्वतन्त्र विभागाध्यक्षो के अधीन चलने से इनमें समन्वय का अभाव देखा गया। फलस्वरूप वर्ष 1953 में तीनो इकाईयों को एक विभागाध्यक्ष के अधीन रखा गया तथा अधीक्षक, आयुर्वेद स्टेडीज का पद समाप्त कर, निदेशक के सहयोगार्थ उप निदेशक का नवीन पद सृजित किया गया। वर्ष 1959 में जयपुर में संचालित आयुर्वेद रसायनशाला को अजमेर में स्थानान्तरित किया गया तथा इसे केन्द्रीय रसायनशाला का दर्जा दिया गया इसमें आयुर्वेद के साथ साथ यूनानी औषधियों का निर्माण भी प्रारम्भ किया गया।
  • तीन इकाईया स्वतन्त्र विभागाध्यक्षो के अधीन चलने से इनमें समन्वय का अभाव देखा गया। फलस्वरूप वर्ष 1953 में तीनो इकाईयों को एक विभागाध्यक्ष के अधीन रखा गया तथा अधीक्षक, आयुर्वेद स्टेडीज का पद समाप्त कर, निदेशक के सहयोगार्थ उप निदेशक का नवीन पद सृजित किया गया। वर्ष 1959 में जयपुर में संचालित आयुर्वेद रसायनशाला को अजमेर में स्थानान्तरित किया गया तथा इसे केन्द्रीय रसायनशाला का दर्जा दिया गया इसमें आयुर्वेद के साथ साथ यूनानी औषधियों का निर्माण भी प्रारम्भ किया गया।
  • वर्ष 1950-51 में दो नवीन आयुर्वेद औषधालय खोले गये। प्रथम पंचवर्षीय योजना अवधि में 143 नवीन औषधालय खोले गये तथा 7 औषधालय जागीर विभाग से स्थानान्तरित किये गये। द्वितीय पंचवर्षीय योजना अवधि में 325 नवीन औषधालय खोले गये तथा 5 औषधालय मध्यप्रदेश राज्य से, 16 औषधालय अजमेर राज्य से तथा 319 औषधालय विभिन्न जिला बोर्डो से विभाग को स्थानान्तरित किये गये। तृतीय पंचवर्षीय योजना काल में 325 नवीन औषधालय खोले गये तथा 11 औषधालय समाज कल्याण विभाग से तथा एक औषधालय जागीर विभाग से स्थानान्तरित किया गया।
  • वर्ष 1966-67, 1967-68 व 1968-69 की वार्षिक योजनाओ में 160 नवीन अस्पताल व औषधालय खोले गये। चतुर्थ पंचवर्षीय योजना अवधि में 185 नवीन औषधालय खोले गयें तथा एक औषधालय निजी प्रबन्धन से राज्याधीन लिया गया। पांचवी पंचवर्षीय योजना काल में 544 नवीन औषधालय प्रारम्भ किये गयें तथा एक औषधालय निजी प्रबन्धन से राज्याधीन लिया गया।छटी,सांतवी,आठवी,व नवी पंचवर्षीय योजना अवधि मे क्रमशः 730,430,32 व 28 नवीन औषधालय/चिकित्सालय प्रारम्भ किये गये।
  • वर्ष 2004-05 में 35 आयुर्वेद तथा 10 यूनानी, वर्ष 2005-06 में 30 आयुर्वेद, 35 होम्योपैथिक एवं 4 यूनानी, वर्ष 2007-08 में 30 आयुर्वेद, 30 होम्योपैथिक, व 10 यूनानी पद्धति तथा वर्ष 2008-09 में 40 आयुर्वेद पद्वति के नवीन औषधालय खोले गये हैं। वर्ष 2009 में 15 आयुवेर्द, 5 होम्‍योपैथिक, 10 यूनानी एवं वर्ष 2010-11 में 15 आयुवेर्द, 5 होम्‍योपैथिक, 10 यूनानी नवीन औषधालय खोले गये । वर्ष 2012-13 में 5 यूनानी औषधालय खोलते की घोषणा की। इसी प्रकार वर्ष 2004-05 में 5 , वर्ष 2005-06 में 17 तथा वर्ष 2008-09 में 7 बी श्रेणी औषधालयों को अ श्रेणी चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया गया है। 2009-10 में 10 वी श्रेणी औषधालय तथा वर्ष 2010-11 में 10 वी श्रेणी औषधालयों को चिकित्‍सालय में क्रमोन्‍नत किया गया। इस प्रकार इस विभाग का स्वरूप क्रमशः विस्तारित होते हुए वर्तमान में राज्यव्यापी नेटवर्क से जनता की चिकित्‍सा सेवा कर रहा है।